सूरजपुर/08 मई 2026/ जिले में संचालित विकसित कृषि संकल्प अभियान के अंतर्गत गुरुवार को विभिन्न विकासखण्डों की ग्राम पंचायतों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों का सफल आयोजन किया गया। अभियान के तहत जिले के सभी छह विकासखण्डों में कुल 12 कार्यक्रम आयोजित कर बड़ी संख्या में कृषकों को आधुनिक खेती की तकनीकों एवं शासकीय योजनाओं से लाभान्वित किया गया।
छह विकासखण्डों की 12 ग्राम पंचायतों में आयोजन:-
अभियान के अंतर्गत विकासखण्ड भैयाथान के ग्राम पंचायत केवरा एवं सलका, ओड़गी के थाडपाथर एवं पकनी, सूरजपुर के पोंड़ी एवं केशवनगर, रामानुजनगर के नारायणपुर एवं अमगांव, प्रतापपुर के लोलकी एवं धोंधा तथा प्रेमनगर के नवापाराकला एवं श्यामपुर में कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में कृषि वैज्ञानिकों, विभागीय अधिकारियों एवं कृषकों की सक्रिय भागीदारी रही।
डीएपी के विकल्प एवं नैनो उर्वरकों के उपयोग पर विशेष जोर:-
कार्यक्रमों में कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को डीएपी उर्वरक के विकल्प के रूप में 12ः32ः16, 20ः20ः13 एवं एसएसपी जैसे अन्य रासायनिक उर्वरकों के उपयोग की विस्तृत जानकारी दी। इसके साथ ही हरी खाद, नील हरित काई तथा 17 प्रतिशत नमक घोल के उपयोग एवं इनके महत्व के बारे में भी विस्तार से बताया गया। कृषि विभाग के अधिकारियों ने नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी को पारंपरिक उर्वरकों के प्रभावी विकल्प के रूप में अपनाने हेतु किसानों को प्रेरित किया।
फसल चक्र परिवर्तन एवं वैकल्पिक खेती को बढ़ावा:-
कार्यक्रम में फसल चक्र परिवर्तन के तहत धान के स्थान पर दलहन, तिलहन, मक्का एवं लघु धान्य फसलों की खेती को अपनाने पर विशेष जोर दिया गया। कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि वैकल्पिक फसलों से न केवल भूमि की उर्वरा शक्ति बनी रहती है, बल्कि किसानों की आय में भी वृद्धि होती है।
योजनाओं की जानकारी एवं डिजिटल पंजीयन प्रक्रिया से अवगत कराया गया:-
किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड के अनुसार संतुलित उर्वरक उपयोग की सलाह दी गई। साथ ही एग्रीस्टैक परियोजना के तहत लोक सेवा केंद्रों के माध्यम से निःशुल्क फार्मर आईडी निर्माण, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना से संबंधित ई-केवाईसी, आधार सीडिंग, सेल्फ रजिस्ट्रेशन एवं फिजिकल वेरिफिकेशन की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी भी प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त डी-कम्पोजर बनाने की विधि से भी कृषकों को व्यावहारिक रूप से अवगत कराया गया।
सहयोगी विभागों ने भी दी योजनाओं की जानकारी:-
इस अवसर पर पशु चिकित्सा सेवा, उद्यानिकी एवं मत्स्य पालन विभाग के अधिकारियों द्वारा भी अपने-अपने विभाग की योजनाओं एवं लाभकारी गतिविधियों की विस्तृत जानकारी किसानों को प्रदान की गई। जिला प्रशासन ने सभी कृषकों से अभियान का अधिकतम लाभ उठाते हुए आधुनिक एवं वैज्ञानिक खेती को अपनाने की अपील की है, ताकि कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता एवं समृद्धि सुनिश्चित की जा सके।






































































































