सूरजपुर/29 अप्रैल 2026/ कृषि विभाग द्वारा किसानों को खेती में हरी खाद के उपयोग के लिए प्रेरित किया जा रहा है, जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने और उत्पादन में सुधार लाने में मदद मिल सके। विभाग के अनुसार धान के खेतों में लगातार रासायनिक उर्वरकों के अधिक उपयोग से मिट्टी में लाभदायक सूक्ष्म जीवों की गतिविधियां कम हो रही हैं और मिट्टी की संरचना भी प्रभावित हो रही है।
इस समस्या के समाधान के लिए किसानों को सन, ढैचा, उड़द, मूंग एवं लोबिया जैसी फसलों को हरी खाद के रूप में उगाने की सलाह दी गई है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार हरी खाद से 25 से 40 प्रतिशत तक पोषक तत्वों की पूर्ति हो जाती है, जिससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है।
जानकारी के अनुसार इन फसलों की बुवाई के 40-45 दिन बाद, फल आने से पहले ही उन्हें खेत में मिला दिया जाता है। इसके लिए प्रति हेक्टेयर 20 से 30 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है। धान की रोपाई से 40-50 दिन पहले इनकी बुवाई की जाती है और रोपाई से 5-7 दिन पूर्व खेत में मिलाया जाता है।
हरी खाद के उपयोग से मिट्टी में जैविक पदार्थों की मात्रा बढ़ती है, साथ ही वातावरण से नाइट्रोजन का स्थिरीकरण होता है और मिट्टी के निचले स्तर से फास्फोरस एवं पोटाश का अवशोषण बेहतर होता है। इससे मृदा की उर्वरता और संरचना दोनों में सुधार होता है।
कृषि विभाग द्वारा खरीफ फसल से पूर्व हरी खाद के बीज उपलब्ध कराने की भी पहल की जा रही है। इसके लिए क्षेत्रीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों के माध्यम से किसानों से मांग लेकर बीज उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है।
उप संचालक कृषि सुश्री संपदा पैकरा ने किसानों से अपील की है कि वे हरी खाद का उपयोग कर मिट्टी के स्वास्थ्य को बेहतर बनाएं और टिकाऊ खेती को अपनाएं।






































































































